Monday, May 7, 2018

इनेलो के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त आयोग से किसानों के लिए सहायता राशि की मांग की 


चंडीगढ़ : 15वें वित्त आयोग द्वारा किए गए चंडीगढ़ दौरे के दौरान इनेलो के एक प्रतिनिधिमण्डल ने हरियाणा और उसके किसानों का पक्ष रखते हुए यह मांग की कि किसानों और राज्य को कर्जे से मुक्त करने के लिए लगभग 63 हजार करोड़ रुपए की सहायता राशि राज्य को दी जाए। इस आशय का ज्ञापन आज इनेलो के एक प्रतिनिधिमण्डल जिसका नेतृत्व आरएस चौधरी और बीडी ढालिया ने किया, वित्त आयोग को प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन में मांग की गई कि किसानों को कर्जे से मुक्त करने के लिए लगभग एक लाख 42 हजार करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी जाए। इस समय भी राज्य के किसानों पर कुल कर्जा 56 हजार करोड़ रुपया आंका गया है। यह दुर्भाग्य की बात है कि हालांकि राज्य की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है और राज्य केंद्रीय अन्न भण्डारण में योगदान देने वाला दूसरा सबसे बड़ा राज्य है फिर भी उसके किसानों की हालत प्रति वर्ष कर्जे के कारण बिगड़ती चली जा रही है।
इनेलो प्रतिनिधिमण्डल ने फसल कटाई के पश्चात पराली इत्यादि के जलाने के मुद्दे को भी उठाते हुए कहा कि हालांकि इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों पर दुष्प्रभाव पड़ता है फिर भी अगली फसल के लिए खेतों को तैयार करने के दबाव के कारण किसान इन्हें जलाता है। इस समस्या से उभरने के लिए पराली इत्यादि के प्रबंधन की आवश्यकता है जिसके लिए प्रति हैक्टेयर लगभग 5 हजार रुपए का खर्चा है। इस कारण गेहूं और धान की कटाई के बाद खेतों के प्रबंधन के लिए लगभग 1825 करोड़ रुपए की सहायता राशि की आवश्यकता है। प्रतिनिधिमण्डल ने राज्य में निरंतर गिरते भू-जल स्तर के कारण आने वाले खतरे का भी जिक्र किया और इस संबंध में वित्त आयोग को बताया कि दादूपुर नलवी नहर निर्माण इसके लिए अतिआवश्यक है क्योंकि भले ही पहले चरण में यह माना गया था कि इसमें बारिश के मौसम में यमुना का अतिरिक्त जल ही उपलब्ध होगा परंतु रेणुका, किसाऊ और लखवी नदियों पर बांध बन जाने के पश्चात हरियाणा को जो उसके हिस्से का जल मिलेगा उस कारण यह नहर बारह महीने पानी से भरी होगी। इस कारण यमुनानगर, अम्बाला और कुरुक्षेत्र जिलों की न केवल लगभग अढ़ाई लाख एकड़ भूमि सिंचित होगी बल्कि यहां के भू-जल स्तर को गिरने से रोकने में भी सहायक होगी। दुर्भाग्यवश इस नहर निर्माण को सरकार ने बंद करने का निर्णय लिया है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार वह किसानों को अतिरिक्त मुआवजे की राशि देने में असफल है। यह राशि लगभग 580 करोड़ रुपए बनती है और लगभग इतनी ही रकम नहर निर्माण को पूरा करने में लगेगी। इनेलो का वित्त आयोग से आग्रह था कि यह पूरी राशि राज्य को सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा दी जाए। 
राज्य में जलाभाव को देखते हुए इनेलो ने ड्रिप-सिंचाई पर बल देने ते हुए यह कहा कि इसके लिए आवश्यक सभी उपकरणों को खरीदने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किसानों को शत-प्रतिशत अनुदान दिया जाना चाहिए। ट्रैक्टर कृषि उपकरणों, खाद, कीटनाशक इत्यादि पर जीएसटी लगाए जाने की निंदा करते हुए आयोग से आग्रह किया कि वह केेंद्र सरकार से इन कृषि संबंधी उपकरणों पर लगाए गए कर को हटा दे। 
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कालांतर में राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ता चला आ रहा है। परिणामस्वरूप आज राज्य अपने कर्ज के भुगतान को तो दूर उस पर ब्याज की राशि को भी लौटाने के लिए भी कर्ज लेना पड़ता है। वर्ष 2018-19 के बजट में कर्ज के ब्याज इत्यादि और कर्ज की राशि पर बनने वाली किश्तों का कुल योग 26503 करोड़ रुपए बनता है। इस राशि के अतिरिक्त वर्तमान वित्तीय वर्ष में लगभग 32 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज सरकार को लेना पड़ेगा। इस वित्तीय वर्ष में राज्य का कुल वित्तीय घाटा 1,61,159 करोड़ रुपए दिखाया गया है। इनेलो का आग्रह है कि केंद्र कम से कम इतनी आधी राशि, 80569 करोड़ रुपए राज्य को सहायता के रूप में दे। 


इन मांगों के अतिरिक्त प्रतिनिधिमण्डल ने यह भी मांग की कि चुंकि दिल्ली के विकास का सारा बोझ उसके आसपास के हरियाणा के क्षेत्र पर पड़ता है इसलिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार राज्य को प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रुपए का अनुदान दे।

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