Saturday, April 7, 2018

एचएसएससी के चेयरमैन भारती को तुरंत बर्खास्त करें मुख्यमंत्री - अशोक अरोड़ा 


कुरुक्षेत्र, 7 अप्रैल: एचएसएससी में भर्ती के नाम पर पैसे लेने के मामले में प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ईमानदार है तो उन्हें तुरंत प्रभाव से एचएसएचसी के चेयरमैन भारत भूषण भारती को उनके पद से हटा देना चाहिए। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भारती को बचाने में लगे हुए हैं। इनेलो प्रदेशाध्यक्ष पत्रकारों से वार्तालाप कर रहे थे। इस अवसर पर पार्टी के शहरी प्रधान रामस्वरूप चोपड़ा, नगर पार्षद नितिन भारद्वाज लाली, जिला उपप्रधान सतबीर शर्मा, राजकुमार काला तथा राजीव गोयल भी उपस्थित थे। 
अरोड़ा ने कहा कि पिहोवा में नप का चेयरमैन बनाने में पैसे का लेनदेन होने के मामले में भी भारती का नाम आया था और इस मामले का भांडाफोड़ भाजपा नेताओं ने ही किया था। अभी इस मामले की विजीलेंस द्वारा जांच की जा रही है और मुख्यमंत्री ने भारत भूषण भारती का चेयरमैन पद का कार्यकाल गुपचुप तरीके से तीन साल के लिए बढ़ा दिया। इसी प्रकार अब एचएसएससी में नौकरी दिलाने में दलाली का काम करने वाले कर्मचारी व अन्य लोग मुख्यमंत्री फ्लाइंग स्क्वाड ने पकड़े हैं। दलालों को तो गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन चेयरमैन भारती से त्याग पत्र नहीं लिया गया। अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का खोखला दावा कर रहे हैं यदि मुख्यमंत्री जनता को भ्रष्टाचार मुक्त शासन देना चाहते हैं तो उन्हें चाहिए कि भारती को तुरंत बर्खास्त करे। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि नौकरी भर्ती में पैसे के लेन-देन का पर्दाफाश होने के बावजूद भी मुख्यमंत्री भारत भूषण भारती को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी देने के मामले में काफी समय से पैसे के लेन-देन के आरोप लग रहे थे लेकिन मुख्यमंत्री इस मामले पर चुप्पी साधे बैठे रहे। अरोड़ा ने कहा कि यदि भारती में थोड़ी बहुत भी नैतिकता है तो उन्हें अपने पद से तुरंत त्याग पत्र दे देना चाहिए अन्यथा मुख्यमंत्री को चाहिए कि भारती को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त करे। इनेलो प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि अपने आपको स्वच्छ छवि की सरकार बताने का दावा करने वाली भाजपा सरकार का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। नौकरियों में सरेआम रिश्वत ली जा रही है। मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टालरेंस की घोषणा हवा हवाई होकर रह गई है। भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है और दुख की बात तो यह है कि अपने आपको ईमानदार बताने वाले मुख्यमंत्री भ्रष्टाचारियों को बचाने में लगे हुए हैं। 

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