Wednesday, April 4, 2018


राज्य सरकार किसानों को पेट्रोल और डीजल के करो में राहत न देकर कर रही है शोषण - अशोक अरोड़ा 


चंडीगढ़, 4 अप्रैल, 2018 : अभी हाल में पेट्रोल ओर डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी की निंदा करते हुए इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने हरियाणा की राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह आम आदमी सहित किसानों को किसी भी प्रकार की पेट्रोल और डीजल के करों में राहत न देकर उनका शोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि यह विडम्बना है कि एक लम्बे समय तक जब अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर गिरावट आ रही थी उस समय भी केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार ने करों में कटौती नहीं की। इस प्रकार की संवेदहीन नीतियों से भाजपा का वह दावा खोखला सिद्ध होता है जिसमें वह किसानों की आय को दोगुना करने की बात करने के साथ अपने आपको किसान हितैषी बताते हैं। डीजल की बढ़ी हुई कीमतों से यह स्पष्ट हो गया है कि उससे फसलों के लागत मूल्य में बढ़ोत्तरी होगी परंतु इस तथ्य के बावजूद भाजपा सरकार स्वामीनाथन अयोग की सिफारिशों को लागू कर न्यूनतम समर्थन मूल्य को तदानुसार बढ़ाने के लिए तैयार नहीं।

इनेलो के प्रदेषाध्यक्ष ने कहा कि इससे पूर्व पहले कभी भी राज्य की कोई भी सरकार आम आदमी के सरोकारों के प्रति इतनी संवेदनहीन नहीं रही। उन्होंने याद दिलाया वर्ष 2014 में सत्ता में आते ही केन्द्र में भाजपा सरकार ने पेट्रोल पर एक्साईज डयूटी को 9.20 रूपये प्रति लीटर से बढ़ा कर 21.48 रूपये प्रति लीटर और डीजल को 3.46 रूपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.33 रूपये प्रति लीटर कर दी थी। अचानक करों की इस बढौतरी से आम आदमी सहित किसान भी ऐसे समय में प्रभावित हुआ जब पहले ही वह बढ़ी हुई कीमतों से जूझ रहा था। इसके उपरांत केन्द्र सरकार ने इस डयूटी को 2 रूपये प्रति लीटर कम तो किया परंतु इससे आम आदमी के कष्टों का कोई निवारण नहीं हुआ। इसके विपरीत ऐसे समय में जब आम जनता एक्साईज डयूटी के बोझ तले दब रही थी तो हरियाणा सरकार ने वैट और डीजल पर क्रमष: 26.25 रूपये और 17.22 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से वैट कर लगाया। यह ध्यान योग्य बात है यह सब ऐसे समय में हुआ जब अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में भारी गिरावट आई थी। ऐसे अनुकूल समय में भी हरियाणा सरकार ने जनता पर करों के बोझ को कम नहीं किया। 
अशोक अरोड़ा ने कहा कि हरियाणा की नीति के कारण आज इस क्षेत्र में पंजाब को छोड़ कर 65.32 रूपये की कीमत पर डीजल सबसे अधिक महंगा है और पेट्रोल तो 74.08 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से सबसे अधिक महंगा है। करों की इस ऊंची दर को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि केन्द्र व राज्य में सरकारें हर कीमत पर आम आदमी से अधिक से अधिक करों को वसूल कर अपने खजाने तो भरना चाहती हैं परंतु उनके दुखों के निवारण करने के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहती।   

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