Friday, October 6, 2017

शिक्षकों का कार्य पराली जलाने की निगरानी नहीं, विद्यार्थियों को अच्छे नागरिक बनाना है - दुष्यंत चौटाला

हिसार, 6 अक्टूबर: एचआरएम पोर्टल पर डाटा एंटरी के बिना शिक्षकों का वेतन रोकने के हरियाणा के आदेश न केवल तुगलकी फरमान है बल्कि यह खट्टर सरकार की औछी मानसिकता का भी प्रतीक है। खट्टर सरकार को इस तुगलकी फरमान को तुरंत वापस लेते हुए सितंबर माह का शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों का वेतन तुरंत जारी करना चाहिए जिससे कि कर्मचारी अक्टूबर माह के त्यौहारों को हंसी-खुशी मना सके। यह मांग इनेलो संसदीय दल के नेता व हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा सरकार से की है। सांसद दुष्यंत चौटाला ने पराली जलाने की देखरेख के लिए लगाई गई शिक्षकों की डयूटी को लेकर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे शिक्षण कार्यों में बाधा करार दिया है। सांसद दुष्यंत ने कहा कि सरकार स्कूलों में शिक्षण का कार्य बाधित कर शिक्षकों को उनकी डयूटी से क्यों भटकाना चाहती है, यह बात समझ से परे है। 
सांसद दुष्यंत चौटाला ने कहा कि डाटा अपलोड में देरी के लिए शिक्षक कहीं जिम्मेवार नहीं है और यदि सरकार को डाटा एंटरी की इतनी ही जल्द थी तो शिक्षा विभाग को यह कदम शिक्षकों को पर्याप्त समय देते हुए पहले उठाना चाहिए था और डाटा अपलोड वाले पोर्टल को सुचारू रूप से चलाने के लिए तकनीकी व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि हजारों शिक्षकों का करीब 80 कॉलम का डाटा केवल 4 दिन में कैसे अपलोड किया जा सकता है। इतना ही नहीं सरकार से इसी बीच 29 सिंतबर को एचआरएम फार्मेट में फिर से बदलाव कर दिया और एचआरएम फार्म अपलोड न होने तक शिक्षकों का वेतन न जारी करने के आदेश जारी कर दिए। 
युवा सांसद ने कहा कि खट्टर सरकार की कार्यप्रणाली और इसके तुगलकी आदेशों से लगता है कि सीएम को न पारिवारिक जिम्मेवारियों का अहसास है और न ही सीएम करवा चौथ, दीपावली जैसे त्यौहारों का एक कर्मचारी और उसके परिजनों के लिए महत्व को समझ पा रहे हैं। यही वजह है कि सरकार ने शिक्षकों को डाटा अपलोड के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया और डाटा अपलोड न करने पर शिक्षकों का उस माह में वेतन का भुगतान रोक दिया जिस माह में दीपावली जैसा पर्व आ रहा है। यह विदित है कि एक कर्मचारी के लिए त्यौहार मनाने के लिए आर्य का एक मात्र स्त्रोत उसका वेतन है। दुष्यंत ने कहा कि फेस्टिवल सीजन में हजारों कर्मचारियों के वेतन रोकने का हमारी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पडऩा स्वाभाविक है। 
 इनेलो सांसद ने कहा कि शिक्षकों का मूल कार्य यह देखना नहीं है कि कौन किस खेत पराली जला रहा है या कौन नहीं, उनका कार्य विद्यार्थियों को शिक्षित कर देश के लिए अच्छे नागरिक तैयार करना है। इसलिए सरकार को शिक्षकों की डयूटी पराली जलाने की निगरानी से तुरंत हटानी चाहिए। 
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब सरकार से इस प्रकार के अव्यवाहारिक और तुगलकी फरमान जारी किए हो, पहले भी कई मामले में सरकार की अपरिपक्वता सामने आ चुकी है। 

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