Monday, October 9, 2017


किसान नहीं जलाएंगे पराली, सरकार हल तो ढूँढकर दे-इनेलो


  • तीन साल में किसान पराली के लिए है आंदोलनरत, सरकार नहीं कर रही कोई ठोस प्रबंध
  • केवल केस दर्ज करने का डंडा दिखाकर किया जा रहा है किसानों को परेशान



फतेहाबाद: भाजपा सरकार को बने 3 साल हो गए हैं और किसानों के खेतों में पराली को लेकर अभी तक कोई प्रबंध नहीं कर पा रही है। उल्टा उन पर पराली जलाने को लेकर किसानों को केस दर्ज करने व जुर्माना आदि का डंडा दिखाकर उनको परेशान किया जा रहा है। यह बात इनेलो की जिला ईकाई ने रविवार को जाट धर्मशाला में पार्टी कार्यालय में आयोजित एक मीटिंग में कही। मीटिंग की अध्यक्षता इनेलो के जिला प्रभारी एवं किसान प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष स.निशान सिंह ने की।  मीटिंग में मुख्य रूप से विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया, जिला प्रधान बलविन्द्र सिंह कैरों, वरिष्ठ नेता कुलजीत कुलडिय़ा, हलका प्रधान भरत सिंह परिहार, बीकर सिंह हड़ौली, हरिसिंह मेहरिया, पवन चुघ, जिला परिषद सदस्य जोगेन्द्र सिहाग, विकास मैहता, यशपाल यश तनेता आदि इनेलो नेता उपस्थित थे। 
इनेलो नेताओं ने कहा कि तीन सालों से किसान प्रदेश में पराली मुद्दे को लेकर आंदोलनरत हैं, किसानों को मजबूरी है कि अगर वह पराली को न जलाएं तो उनकी रबी की फसल की बिजाई समय पर नहीं होगी, सरकार किसानों के लिए पराली न जलाने के फतवे तो जारी कर रही है, लेकिन पराली के समाधान की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि इनेलो लगातार उपायुक्तों के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजकर किसानों की पराली खेत से निकालने के लिए मशीन देने, जिला स्तर पर गत्ते के कारखाने खोलने, ताकि एग्रो बेस्ड मटेरियल की यहां पर खपत हो सके की मांग करती आई है। लेकिन प्रदेश में यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बनी हुई है कि सरकार ने इस मामले में 1 कदम भी आगे नहीं बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि 10 सितम्बर को जब मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर फतेहाबाद आए थे तो इनेलो का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिला था। मुलाकात में सीएम से इनेलो नेताओं ने मांग की थी कि फतेहाबाद में गत्ते की फैक्टरी खोली जाए, लेकिन सीएम ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि गत्ते की फैक्टरी से सरकार को नुक्सान होगा, इसलिए नहीं खोली जा सकती। किसानों को सबसीडी पर मशीन देने की बात को तो सीएम हंसकर टाल गए। इनेलो नेताओं ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सिफारिशों में कहा गया है कि छोटा किसान अपने खेत से पराली नहीं निकाल सकता तो प्रशासन अपने स्तर पर उसे पराली निकालकर दे। इसी प्रकार बड़े किसान को मशीन उपलब्ध करवाई जाए, लेकिन सरकार किसानों का साथ देने की बजाए उनपर डण्डा चलाने से बाज नहीं आ रही है। किसान ने तो अब यह फरमान भी जारी कर दिए हैं कि अगर किसी गांव के खेत में पराली जलती है तो सरपंच को सस्पेंड कर दिया जाएगा और पटवारी इसकी जानकारी प्रशासन को नहीं देता तो उसको सस्पेंड कर दिया जाएगा। यह किसी के साथ न्याय नहीं, बल्कि सरासर तानाशाही है। इनेलो नेताओं ने कहा कि किसान भी समझते हैं कि पराली जलाने से प्रदूषण फैलता है, लेकिन वह मजबूर भी हैं। सरकार को किसानों की मजबूरी को समझना चाहिए। इनेलो सरकार से मांग करती है कि किसानों को खेत से पराली निकालने के 5 हजार रुपये प्रति एकड़ दिया जाए, अन्यथा मनरेगा के तहत किसानों की पराली निकाली जाए। किसान आंदोलनरत है और किसानों के हर कदम में इनेलो उनका साथ देगी। 

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