Monday, May 8, 2017

अभय चौटाला ने शाहबाद हल्के की सभाओं मे कहा-सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल है


शाहाबाद : इनेलो के वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला और प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने सोमवार को कुरूक्षेत्र जिले के शाहबाद विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवो का दौरा करते हुए सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए कहा कि सरकार ने चुनावों में लोगों के साथ किए किसी भी वादे को पूरा नहीं किया है। इनेलो नेताओं ने सरकार से एसवाईएल के अधूरे निर्माण को जल्द पूरा करने, प्रदेश में बिजली-पानी संकट का तुरंत समाधान करने, ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में 24 घण्टे बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने और आगजनी से हुए फसलों को नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित किसानों को 25 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की। इनेलो नेताओं ने लोगों से 12 मई को शाहबाद में एसवाईएल व बिजली-पानी के मुद्दे पर दिए जा रहे धरने में भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने का आग्रह किया। इस अवसर पर जिला प्रधान कुलदीप सिंह मुलतानी, बूटा सिंह लूखी, अमनदीप कंबोज, राम करण काला, कंवलजीत सिंह अजराना, पार्षद नितिन लाली, सोमनाथ शर्मा व जयपाल चढूनी सहित पार्टी के अनेक प्रमुख नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे। इन सभाओं मेंं इनेलो नेताओं को सम्मान सूचक पगडी पहनाकर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।



इन ग्रामीण सभाओं को सम्बोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि एसवाईएल हरियाणा की जीवनरेखा है और इसके निर्माण के लिए इनेलो बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने के लिए भी तैयार है और जब तक नहर का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो जाता इनेलो अपना आंदोलन जारी रखेगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हरियाणा अलग राज्य के रूप में अस्तिव में आने के बाद से प्रदेश अपने हिस्से के पानी के लिए निरंतर संघर्ष कर रहा है। जननायक चौधरी देवीलाल के मुख्यमंत्रित्व काल में एसवाईएल का निर्माण कार्य शुरू हुआ और ज्यादातर काम उनके कार्यकाल में ही मुकम्मल हुआ। उसके बाद नहर का निर्माण कार्य ठप्प हो जाने पर चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाली सरकार की जोरदार पैरवी से 2002 में सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाणा के पक्ष में फैसला देते हुए पंजाब सरकार को एक वर्ष के अंदर नहर का निर्माण पूरा करने का आदेश दिया और साथ ही केंद्र सरकार को भी आदेश दिया कि अगर पंजाब सरकार एक वर्ष में नहर पूरा नहीं करती तो केंद्र अपनी एजेंसियों के माध्यम से इस नहर के निर्माण को पूरा करवाए।


इनेलो नेताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले पर पंजाब ने कई तकनीकी आपत्तियां उठाई और उन सबको खारिज करते हुए 4 जून, 2004 को सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाणा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार से अपनी किसी एजेंसी के माध्यम से नहर के अधूरे निर्माण को पूरा करवाने के आदेश दिए। इन आदेशों के बाद उस समय की पंजाब की कैप्टन अमरेंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने सभी नदी जल समझौते रद्द करने का विधानसभा से एक विधेयक पारित कर दिया। उस विधेयक की वैधानिकता जांचने के लिए राष्ट्रपति ने उसे सर्वोच्च न्यायालय के पास भेज दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने 10 नवम्बर, 2016 को पंजाब विस द्वारा पारित उस विधेयक को असंवैधानिक घोषित कर दिया। इसी बीच पंजाब ने अपने खिलाफ फैसला आ जाने के भय से विस में एक प्रस्ताव पारित करते हुए नहर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन को किसानों को वापिस देने का निर्णय लिया और यह निर्णय भी संविधान के संघीय ढांचे पर फिर से प्रहार था।


इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोडा ने हरियाणा में बिजली-पानी संकट को लेकर भी सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों और बिजली की सप्लाई में की जा रही निरंतर कटौती के कारण आज भीषण गर्मी में प्रदेश के लोग गम्भीर संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार दावा करती है कि उनके पास सरप्लस बिजली है और दूसरी तरफ बिजली निगम बारह घंटे के घोषित कट और उसके अलावा अनेक बार अघोषित कट लगाकर लोगों को परेशान कर रही है जिसके चलते लोगों का सब्र का बांध टूट गया है और लोग जगह-जगह बिजली पानी संकट को लेकर धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिजली व पानी संकट के कारण लोगों के साथ-साथ पशुधन भी बेहद परेशान है। इनेलो नेताओं ने ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में 24 घण्टे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग करते हुए लोगों के लिए पीने के पानी की पूरी व्यवस्था और पशुधन के लिए भी जोहड़ों में समुचित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की मांग की।

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