Tuesday, May 9, 2017


एसवाईएल को लेकर इसराना हल्के के इनेलो कार्यकर्ताओं ने धरना दिया 


पानीपत : एसवाईएल के मामले में इनेलो हल्का इसराना के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा जिला अध्यक्ष सुरेश काला के नेतृत्व में लघु सचिवालय के सामने एक दिवसीय धरना दिया गया व तहसीलदार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौपा गया। उन्होंने भरोसा दिलाया की ज्ञापन को प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचा दिया जायेगा। आज सुबह करीब 11 बजे इनेलो के हल्का इसराना के पदाधिकारी व कार्यकर्ता लघु सचिवालय के सामने एकत्रित होने शुरू हो गए यहां पर हरियाणा के विपक्ष के नेता इनेलो विधायक अभय चौटाला के नेतृत्व में धरना दिया जाना था पर श्री चौटाला किसी कारणवंश नहीं आ सके तो पार्टी के जिला अध्यक्ष सुरेश काला के नेतृत्व में धरना शुरू किया गया कार्यकर्ताओं ने भाजपा मुर्दाबाद व इनेलो जिंदाबाद के नारे लगाए। यहां पर बोलते हुए सुरेश काला ने कहा कि एसवाईएल नहर को लेकर भाजपा व कांग्रेस गंभीर नहीं है। लेकिन इनेलो एसवाईएल का पानी हरियाणा में लाने को लेकर पूरी तरह से गंभीर है और एसवाईल का पानी हरियाणा में लाने को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं का संघर्ष जारी रहेगा। इनेलो द्वारा एसवाईएल की 23 फरवरी को अंबाला के गांव ईस्माइलपुर में खुदाई करनी थी पर पुलिस ने पार्टी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। जिससे नहर की खुदाई नहीं हो सकी भविष्य में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के निर्णय व नेतृत्व में कार्यकर्ता किसी भी संघर्ष व कुर्बानी के लिए तैयार हैं।


 श्री काला ने कहा कि हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.चौ.देवीलाल ने 1979 को पंजाब को एक करोड़ रूपये एसवाईएल नहर के निर्माण के लिए दिये थे ताकि नहर के निर्माण के बाद हरियाणा को उसके हिस्से का पानी मिल सके। वहीं 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौजूदगी में पंजाब, हरियाणा व राजस्थान सरकार में समझौता हुआ था जिसके अनुसार नहर का निर्माण 31 दिसम्बर 1981 तक पूरा किया जाना था पर हुआ नहीं। श्री काला ने कहा कि स्व.देवीलाल के मुख्यमंत्रीकाल 1987 से 1990 तक नहर का 60 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हुआ था। इसके बाद फिर से काम ठप्प हो गया। जिसके बाद मामला माननीय सर्वोच्च न्यायलय में चला गया जहां से 15 जनवरी 2002 को पंजाब सरकार को एक साल में नहर का निर्माण पूरा करने के आदेश दिए गए थे। यही नहीं माननीय न्यायलय ने केन्द्र सरकार को भी आदेश दिय थे कि वह अपने दायित्व को पूरा करते हुए यह सुनिश्चित करे कि पंजाब सरकार यदि नहर का निर्माण नहीं कराती है तो केन्द्र सरकार अपने स्तर पर एजेसियां द्वारा उस कार्य को पूरा कराएं। श्री काला ने कहा कि पंजाब सरकार ने एक के बाद एक तकनीकि आपत्तियां उठाई पर 4 जून 2004 को सर्वोच्चय न्यायलय ने एक बार फिर से केन्द्र सरकार को एक महीने में पूरा कराने का कहा था। जबकि पंजाब विधानसभा ने अतीत सभी अन्र्तराज्यीय जल समझौतों को रद्द करने का एक विधयेक वर्ष 2004 में पारित कर संघीय ढांचे, न्याय और आपसी भाईचारे पर प्रहार करने का काम किया। वहीं सर्वोच्च न्यायलय में 10 नवम्बर 2016 को पंजाब विधानसभा के उक्त विधयेक को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। धरने के बाद प्रदर्शनकारी लघु सचिवालय उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने पहुंचे पर उपायुक्त मौजूद नहीं होने के चलते तहसीलदार जीवेन्द्र मलिक को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें मांग की गई है कि सर्वोच्च न्यायलय के निर्णय अनुसार पंजाब मे एसवाईएल क अधूर निर्माण को किसी केन्द्रीय एजेंसी की देखरेख में जल्द से जल्द पूरा कराए। तहसीलदार ने आश्वासन दिया की उनके ज्ञापन को शीघ्र से शीघ्र प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दिया जायेगा। इस अवसर पर पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुमारी फूलवती, पूर्व स्पीकर सतबीर कादियान, जिला प्रेस संयोजक शेरसिंह खर्ब एडवोकेट, हल्का इसराना अध्यक्ष गुरूचरण सिंह, बलवाल वाल्मीकि, शहरी अध्यक्ष नरेश जैन एडवोकेट, ग्रामीण प्रधान कुलदीप राठी, युवा नेता देवेन्द्र कादियान, सुबेदार प्रताप सिंह, सुरेन्द्र धौला, सुरेश भट्टी, कोच तिलक राज, सज्जन सिंह सहरावत, ओमप्रकाश शेरा, निशान सिंह मलिक, महेन्द्र कलसन, हरलाल मलिक, जसमेर रोड़, प्रेम सहरावत, गुलाब खंडरा, यशपाल ढांडा, शमशेर देसवाल, रणबीर डिडवाड़ी एडवोकेट , सुशील रोड़, प्रेमलता छौक्कर, शकुंतला, सुनीता, राजपाल फौजी, सुरेश सैनी, प्राण रत्नाकर, लहना सिंह व सतबीर खर्ब आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।


No comments:

Post a Comment