Monday, April 17, 2017

एसवाईएल निर्माण को लेकर इनेलो रोहतक हलके के कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर दिया धरना


चंंडीगढ़ : इनेलो की ओर से एसवाईएल के अधूरे निर्माण को पूरा करवाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर शुरू किए गए अनिश्चितकालीन धरना निरंतर जारी है। इस धरने में सोमवार को रोहतक हलके के इनेलो कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और एसवाईएल का निर्माण जल्द करवाए जाने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने में जंतर मंतर रोहतक विधानसभा सतीश नांदल जिला प्रधान रोहतक, राजेश सैनी हल्का प्रधान, रमेश कपूर, रविंदर सांगवान सहित अनेक प्रमुख नेताओं व कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इनेलो नेताओं ने केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार पर एसवाईएल के मुद्दे पर ढुलमुल रवैया अपनाने और प्रदेश के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इनेलो नेताओं ने कहा कि कांग्रेस व भाजपा एसवाईएल के मुद्दे पर गम्भीर नहीं है और मामले को लटकाने के लिए आए दिन नए-नए बहाने तलाश किए जा रहे हैं। इनेलो नेताओं ने कहा कि अगर कांग्रेस व भाजपा नेताओं को प्रदेश के हितों की चिंता है तो उन्हें राजनीति से हट कर इनेलो के संघर्ष में शामिल होना चाहिए।
इनेलो नेताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हरियाणा के पक्ष में आने के साथ ही केंद्र सरकार को इस नहर का निर्माण कार्य शुरू करवाना चाहिए क्योंकि अदालत ने केंद्र को नहर का निर्माण पूरा करवाने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि केंद्र अपनी जिम्मेदारी निभाने की बजाय प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ कर रहा है जो कि हरियाणा की जनता किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी और इनेलो के नेतृत्व में निर्णायक संघर्ष करने के मूड में है। उन्होंने कहा कि एसवाईएल न सिर्फ हरियाणा की जीवनरेखा है बल्कि इस नहर के अधूरे निर्माण को पूरा करने से ही प्रदेश की बंजर भूमि उपजाऊ हो सकती है और लोगों को पीने के पानी के संकट से उभारा जा सकता है। इनेलो नेताओं ने कहा कि हरियाणा किसी से खैरात नहीं मांग रहा बल्कि अपने हिस्से का पानी मांग रहा है जो कि अलग राज्य बनने पर हरियाणा को अपने हिस्से में मिला था।

 
इनेलो नेताओं ने कहा कि पिछले 50 सालों से हरियाणा को अपने हक के पानी से वंचित किया जा रहा है और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद नहर का निर्माण न होना न सिर्फ अदालत की अवमानना है बल्कि संविधान पर भी चोट पहुंचाने का प्रयास है। इनेलो नेताओं ने कहा कि पंजाब के कांग्रेसी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंदर सिंह ने एसवाईएल के निर्माण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हरियाणा के पक्ष में आने के बाद पंजाब विधानसभा से एक ऐसा गैर संवैधानिक कानून पारित किया जिसके अंतर्गत नदी जल समझौते रद्द करने की बात कही गई थी और यह बिल देश के संघीय ढांचे पर प्रहार था। इनेलो नेताओं ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा नहर के निर्माण में अड़ंगे लगाने का काम किया और जब भी नहर का निर्माण शुरू होने की उम्मीद बनती तो कांग्रेस किसी न किसी तरह इसमें अवरोधक खड़े करने का काम करती रही है। उन्होंने कहा कि दस साल तक हरियाणा व केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही लेकिन कांग्रेस ने नहर के अधूरे निर्माण को पूरा करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
 इनेलो नेताओं ने कहा कि पिछले अढाई साल से हरियाणा व केंद्र में भाजपा की सरकार है और अब भाजपा भी इस मुददे पर टालमटोल का रवैया अपनाए हुए है। इनेलो नेताओं ने कहा कि इनेलो इस मुद्दे पर अब निर्णायक संघर्ष लडऩे के मूड में है और जब तक नहर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता तब तक इनेलो अपना संघर्ष जारी रखेगी। जंतर-मंतर पर दिए गए धरने में पार्टी के अन्य नेताओं के अलावा नछत्तर सिंह महलान, कुणाल गहलावत, चिंटू शर्मा, उमेश देवी, सुनील फोगाट, फूल राणा, जितेंद्र गहलावत, जितेंद्र मालिक, रामचंद्र राठी, सुशील शर्मा, शीला खरैटी व कृष्णा देवी सहित अनेकों इनेलो कार्यकर्ता धरने में शामिल हुए। इस मौके पर पूर्व विधायक स्वामी अग्निवेश ने आज धरने पर आकर इस सतलुज यमुना लिंक नहर को खोदने के लिए दिए जा रहे इनेलो पार्टी के धरने को समर्थन दिया और कहा कि इनेलो प्रदेश के हित में मजबूती से लड़ाई लड़ रही है और इस संघर्ष से निश्चित तौर पर नहर के अधूरे निर्माण को पूरा करवाने में मदद मिलेगी और प्रदेश की प्यासी धरती नहर बनने से निश्चित तौर पर खुशहाल हो जाएगी।

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