Tuesday, April 18, 2017

एसवाईएल पर सोनीपत हलके के कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर दिया धरना


एसवाईएल को लेकर इनेलो की ओर से जंतर-मंतर पर शुरू किया गया बेमियादी धरना मंगलवार को भी जारी रहा। सोनीपत विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने आज पूर्व विधायक व पार्टी के जिलाध्यक्ष पदम सिंह दहिया, हलका प्रधान सुरेंद्र छिकारा व सुरेंद्र पंवार के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर धरना दिया गया और एसवाईएल के अधूरे निर्माण को जल्द पूरा करवाए जाने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इनेलो नेताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हरियाणा के पक्ष में आने के बावजूद अभी तक नहर का निर्माण न होना यह दर्शाता है कि कांग्रेस व भाजपा की इस नहर के अधूरे निर्माण को पूरा करवाने में कोई रूचि नहंीं है। इनेलो नेताओं ने कहा कि एसवाईएल हरियाणा की जीवनरेखा है और इसके अधूरे निर्माण को पूरा करवाने के लिए इनेलो कोई भी बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटेगी और जब तक नहर का अधूरा निर्माण पूरा नहीं हो जाता तब तक इनेलो का आंदोलन जारी रहेगा। 
इनेलो नेताओं ने कहा कि एसवाईएल के निर्माण में स्व. जननायक चौधरी देवीलाल की अहम भूमिका रही और उनके मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए एसवाईएल के लिए पंजाब क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई और इस नहर के लिए सबसे पहले चौधरी देवीलाल ने ही बतौर मुख्यमंत्री पंजाब को धनराशि दी थी। सबसे ज्यादा निर्माण कार्य भी चौधरी देवीलाल के मुख्यमंत्री रहे हुए हुआ और यह बात खुद पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने हरियाणा विधानसभा में खुले मन से स्वीकार करते हुए कहा था कि सबसे ज्यादा काम चौधरी देवीलाल के समय में हुआ है और वे चौधरी देवीलाल के चाहे राजनीतिक विरोधी हैं इसके बावजूद सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एसवाईएल के मामले को ठण्डे बस्ते में डालने का काम किया और चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने मुख्यमंत्री बनते ही इस नहर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में जोरदार पैरवी की जिसके चलते सर्वोच्च न्यायालय का फैसला 2002 में हरियाणा के पक्ष में आया।


इनेलो नेताओं ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की और पंजाब की याचिका 2004 में न सिर्फ खारिज हो गई बल्कि सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से अपनी किसी एजेंसी के माध्यम से एसवाईएल के अधूरे निर्माण को पूरा करवाने के आदेश दिए। इस फैसले में अड़ंगा लगाने के लिए उस समय पंजाब में कैप्टन अमरेंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पंजाब विस में नदी जल समझौते रद्द करने वाला बिल पारित कर दिया जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक था। 2005 से 2007 तक पंजाब, हरियाणा व केंद्र में कांग्रेस की सरकारें थी लेकिन कांग्रेस ने नहर पूरी करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इतना ही नहीं दस साल तक हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार रही और इस दौरान केंद्र में भी कांग्रेस की सरकार थी और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर किसी भी अदालत का कोई स्थगन आदेश नहीं था इसके बावजूद भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने नहर को पूरा करवाना तो दूर मामले पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी।
इनेलो नेताओं ने कहा कि अब पिछले अढाई सालों से हरियाणा व केंद्र में भाजपा की सरकार है और इस दौरान पंजाब में भी भाजपा गठबंधन की सरकार रही लेकिन भाजपा नेताओं ने नहर को पूरा करवाने में कोई रूचि नहीं दिखाई। इनेलो नेताओं ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री पिछले करीब पांच महीनों से एसवाईएल के अधूरे निर्माण को पूरा करवाने के मामले में प्रधानमंत्री से मिलने का समय नहीं ले पाए हालांकि उन्होंने कहा था कि वे विपक्षी दलों को साथ लेकर प्रधानमंत्री के समक्ष हरियाणा का पक्ष रखने के लिए समय लेंगे और सर्वदलीय प्रतिनिधिमण्डल लेकर जाएंगे। इनेलो नेताओं ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा के नेता आज भी एसवाईएल पर दोहरी भाषा बोल रहे हैं। एक तरफ जहां वे पंजाब में हरियाणा को एक बूंद भी पानी न देने की बात करते हैं वहीं हरियाणा में उनकी भाषा अलग होती है और दोनों दलों का आलाकमान आज तक इस मुद्दे पर अपना स्टेंड स्पष्ट नहीं कर पाया है। इनेलो नेताओं ने कहा कि अलग राज्य बनने के बावजूद हरियाणा को उसके हिस्से का पानी न मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और हरियाणा के साथ घोर अन्याय व सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना भी है। उन्होंने कहा कि इनेलो प्रदेशवासियों को साथ लेकर अपना संघर्ष जारी रखेगी। इस अवसर पर राजकुमार रिढाउ, नछत्तर सिंह मल्हान, युवा जिला प्रधान कुणाल गहलावत, हरिप्रकाश मंडल, प्रोमिला मलिक, जिले सिंह दहिया, जितेंद्र वर्मा, फूल कुमार चोहान, बैयराज दहिया, अंजू अंतिल, मुकेश बागड़ी, डॉ भगत, मास्टर अजमेर, राजेंद्र मलिक व विकास मलिक सहित भारी संख्या में इनेलो नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे।

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