Thursday, April 6, 2017

आज नूँह में जननायक स्व: चौ. देवीलाल जी की 16 वीं पुण्यतिथि मनाई गई



आज विधायक चौ0 ज़ाकिर हुसैन व जिलाध्यक्ष मास्टर बदरुद्दीन के नेतृत्व में इनेलो नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी दफ्तर, अनाज मंडी,नूँह में  किसान,गरीब,मजदूरों के मसीहा स्व. जननायक चौधरी देवीलाल की 16 वीं पुण्यतिथि मनाईं। इस अवसर पर नूँह से इनेलो विधायक चौधरी ज़ाकिर हुसैन व जिलाध्यक्ष मास्टर बदरुद्दीन ने स्व: चौ0 देवीलाल जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा श्रद्धांजलि पेश की।
नूँह से इनेलो विधायक चौधरी ज़ाकिर हुसैन ने कहा कि आज स्व: चौ0 देवीलाल की पुण्यतिथि हरियाणा के साथ-साथ दिल्ली व पंजाब के अलावा देश के अनेक राज्यों में बेहद श्रद्धा के साथ मनाई गई। मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित चौधरी देवीलाल की समाधि संघर्ष स्थल पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन करके स्व. जननायक को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा के अलावा पार्टी के सांसद, विधायक, पूर्व विधायक व वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में अन्य राजनीतिक दलों के नेता व चौधरी देवीलाल के अनुयायियों ने भाग लिया।
श्री हुसैन ने बताया कि हरियाणा भर में इनेलो नेताओं व कार्यकर्ताओं की ओर से स्थानीय स्तर पर हर साल की तरह इस साल भी प्रदेशभर में जगह-जगह सर्वधर्म प्रार्थना सभाएं आयोजित की। इसके अलावा नेत्रदान कैम्प, रक्तदान कैम्प, वृक्षारोपण, सफाई अभियान, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, मरीजों को फल व दवाइयां वितरित करके और गरीब बच्चों को किताबें व वर्दी देने के अलावा चौधरी देवीलाल को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके दिखाए गए रास्ते पर चलने और उनकी नीतियों का अनुसरण करने का संकल्प दोहराया गया।
  इनेलो विधायक चौ0 ज़ाकिर हुसैन ने कहा कि हरियाणा के निर्माता रहे स्व: चौधरी देवीलाल सिर्फ स्वतंत्रता सेनानी, किसानों, गरीबों, मजदूरों और कमेरे वर्ग के मसीहा ही नहीं थे, बल्कि एक युगपुरुष थे। उनकी करनी और कथनी में कोई फर्क नहीं था और वे बेहद संघर्षशील, जुझारू व निर्भीक राजनेता थे जिनकी जड़ें जमीन और देश के आम जनमानस के साथ जुड़ी हुई थी। वे मात्र 15 वर्ष की आयु में अपने घर वालों को बिना बताये ही आजादी के आन्दोलन में कूद पड़े।
चौधरी देवीलाल एक सशक्त एवं क्रांतिकारी व्यक्तित्व के धनी थे। वे निर्भीक, पराक्रमी, अत्यन्त साहसी और मानवता के पुजारी थे। अन्याय व अत्याचार का मुकाबला करने के लिये वे सदैव तत्पर रहते थे। उन्होंने देश के किसानों के शोषण के विरुद्ध जोरदार आवाज उठाई थी, क्योंकि युग-युग से पीडि़त व शोषित किसान तथा ग्रामीण समुदाय के प्रति उनका असीम प्रेम था। जनता के हक की लड़ाई को वे ‘न्याय-युद्ध’ कहते थे। उनका जीवन खुली किताब था। वे सच्चे अर्थों में गांधीवादी होने के साथ-साथ सरलता, सज्जनता, सादगी, तप और त्याग की प्रतिमूर्ति थे। उनका ग्राम स्वराज और ग्राम पंचायत व्यवस्था में अटूट विश्वास था। वे स्वतन्त्रता संग्राम के नायक होने के साथ-साथ ग्राम स्वराज की लड़ाई लडऩे वाले एक अप्रतिम योद्धा थे। 1987 में दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने देशभर के विपक्षी दलों को कांग्रेस के खिलाफ एक मंच पर इकठ्ठा किया और देश में जनता दल के गठन में अहम् भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से ही 1989 में जनता दल की सरकार बनी और गांधी-नेहरू परिवार के शासन को देश से उखाड़ फैंकने वाले चौधरी देवीलाल को सर्वसम्मति से देश का प्रधानमंत्री चुन लिया गया। जुबान के धनी चौधरी देवीलाल ने अपना वचन निभाते हुए अपना प्रधानमंत्री पद का ताज वीपी सिंह के सिर पर रख दिया। त्याग का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि उन्होंने प्रधानमंत्री के पद को भी ठुकरा दिया और पार्टी संगठन व देशहित में उप-प्रधान मंत्री बनना स्वीकार किया। यह उनके पचहत्तर वर्ष के राजनैतिक जीवन में नैतिक मूल्यों और आदर्शों की सबसे ऊंची उड़ान थी। अपने संघर्षमय जीवन में चौधरी देवी लाल हार-जीत की परवाह नहीं करते थे।  उन्होंने हरियाणा के प्रति हो रहे अन्याय के विरुद्ध श्री गोपीचन्द भार्गव, श्री भीमसेन सच्चर और स. प्रताप सिंह कैरों जैसे दिग्गज मुख्यमंत्रियों से टक्कर ली। उनके ही संघर्ष का परिणाम था कि सन् 1966 में हरियाणा का अलग राज्य के रूप में गठन हुआ जिसकी आज एक अलग पहचान है।
चौधरी देवीलाल किसानों की लड़ाई वातानुकूलित कमरों में बैठ कर नहीं लड़ते थे। गाँव-गाँव और चौपालों तक उनकी सीधी पहुँच थी इसीलिए उन्हें सम्मानपूर्वक ताऊ के नाम से संबोधित किया जाता था। लोगों के बीच गाँव में चारपाई पर बैठकर हुक्का पीते-पीते  ही वे जन समस्याएं सुनते थे और अधिकांश का मौके पर ही निराकरण कर देते थे। चौधरी देवीलाल को जनतन्त्र के मंच पर लोकप्रियता के लिये लेन-देन, सौदेबाजी और बनावट नहीें आती थी। वे स्पष्ट वक्ता थे और कहा करते थे कि ‘लोक राज, लोक लाज से चलता है।’ लड़ाई तो ‘लुटेरों’ और ‘कमेरों’ के बीच है। इस देश में पूँजीपति, सत्ता से रिश्ता जोडक़र काश्तकारों और गरीब जनता का भरपूर शोषण करते हैं। यह व्यवस्था बदली जानी चाहिए। वे नहीं चाहते थे कि चंद पूँजीपति, गणतन्त्र पर हावी हो जाएं। उन्होंने 6 अप्रैल, 2001 को परलोक सिधारने से पूर्व देश के नीतिविदों और राजनेताओं को सावधान किया था कि ‘‘कृषि क्षेत्र की देश की राष्ट्रीय आय में भागीदारी बढ़ाने के लिये गिरते पूंजीनिवेश को रोकना होगा ताकि खेती अलाभप्रद बनकर ही न रह जाये तथा वैश्वीकरण की आंधी में कहीं चौपट ही न हो जाये’’। आपातकाल के दौरान अन्य राष्ट्रीय नेताओं के साथ हरियाणा के सपूत और देश के इस महान् नेता चौधरी देवीलाल व उनके बेटे चौधरी ओमप्रकाश चौटाला को 19 महीने जेल में रखा गया। आपातकाल की समाप्ति के बाद देश में जनता पार्टी का शासन स्थापित हुआ और 21 जून, 1977 को उन्होंने पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री के पद को सुशोभित किया और 27 जून, 1979 तक इस पद पर बने रहे। दूसरी बार 1987 में वे फिर हरियाणा के मुख्यमंत्री बने और जनता को स्वच्छ प्रशासन दिया। इस छोटी-सी अवधि में उन्होंने ग्रामीण विकास और जनकल्याण की अनेक योजनाएं शुरू कीं। इनमें मैचिंग ग्रांट और गांव-गांव में चौपालों के निर्माण की योजना प्रमुख हैं। उन्होंने अपने चुनावी वादों के दौरान जनकल्याण की जो बातें कही थीं उन्हें पूरा कर एक आदर्श स्थापित किया। ‘भ्रष्टाचार बन्द और बिजली-पानी का प्रबन्ध’, ‘प्रशासन आपके द्वार’, ‘हर खेत को पानी, हर हाथ को काम’, ‘हर तन पै कपड़ा, हर सिर पै मकान’, तथा ‘हर पेट में रोटी, बाकी बात खोटी’, उनके प्रिय नारे थे।  चौधरी देवीलाल को किसानों के मसीहा, महान् स्वतन्त्रता सेनानी, हरियाणा के जन्मदाता, राष्ट्रीय राजनीति के भीष्म पितामह, करोड़ों भारतीयों के जननायक तथा त्याग और संघर्ष के पर्याय के रूप में जाना जाता है और आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं। महात्मा गांधी की तरह उनका मानना था कि असली भारत तो गांवों में ही बसता है। जब तक गांवों का आत्मनिर्भर इकाई के रूप में चहुंमुखी विकास नहीं होगा, तब तक गांधी जी के ‘स्वराज’ का सपना पूरा नहीं होगा। वे हमेशा विपक्षी दलों को एकजुट करने में अहम् भूमिका निभाते रहे और देश में सत्ता दलों के नेता उनका भारी सम्मान करते थे। हमें आज एक बार फिर उनकी कमी महसूस होती है। यद्यपि आज वे हमारे मध्य नहीं हैं किन्तु उनके आदर्शमय, त्यागमय व तपोमय जीवन से हम सब भारतवासी युगों-युगों तक प्रेरणा लेते रहेंगे।
इस अवसर पर गणेश दास अरोड़ा, नासिर हुसैन, हरीश मलिक, हाजी सुबराती खान, तलहा एडवोकेट, अल्ली प्रधान, शहनाज हुसैन घासेड़ा, हाजी अब्दुल्ला सरपंच, आस मौ0 सालाहेड़ी, हितेश देशवाल, सरोज बाला, बानों, रमजान सरपँच रोजकामेव, जाकिर भड़ंगाका, लियाकत सरपंच,हरीश शर्मा उर्फ बॉबी, सोहराब सरपंच, राकेश देशवाल, युनुस मेवली, महजर सरपंच, सपात, हाजी शौकत, जफरूद्दीन बाबूपुर, जकरिया सरपंच, शेरू देवला, जैनू सरपंच रेहना, हाजी शोकत सरपंच, जुबेर टेरकपुर, हाजी आसम रायसीका,पहलू कंवरसीका, प्रकाश सरपंच किरा, अमरसिँह सरपंच, निसार पहलवान, शकील रायपुरी आदि इनेलो नेता व सैंकड़ो कार्यकर्ता मौजूद थे।

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