Friday, April 14, 2017

बाबा साहेब द्वारा बनाये गए संविधान की बदौलत हम खुलकर लेते हैं साँस - सतीश नांदल


रोहतक : भारतवर्ष के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सुशोभित, संविधान रचियेता, महान शिक्षाविद, दूरदर्शी सोच के धनी डॉ बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जीवनकाल बचपन से ही संघर्ष भरा रहा था। बाबा साहेब का जन्म महाराष्ट्र के जिला महू में 14 अप्रैल वर्ष 1891 को एक दलित परिवार में हुआ था। बचपन से पढाई के शौकीन बाबा साहेब प्रतिदिन सुबह जल्द उठकर पढ़ने बैठ जाते थे। वे बचपन से ही छुआछूत, भेदभाव के शिकार होते रहे। उच्च कोटि की पढ़ाई हेतु वे अमेरिका गये। अमेरिका से पढाई कर जब उन्होंने फिर से छुआछूत को महसूस किया तो उन्होंने इस अन्याय के विरुद्ध बिगुल बजा दिया। उन्होंने बहुजन समाज ही नही अपितु पिछड़े वर्ग के लोगों व महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ने का काम किया था। उक्त कथन इनेलो के जिलाध्यक्ष व प्रदेश प्रवक्ता सतीश नांदल ने कहे।
इनेलो नेता सतीश नांदल ने कहा कि भारत में सदियों से बहुजन समाज को अन्याय व गुलामी का शिकार रहा है। अनेक समाज सुधारकों ने समय समय पर इस अन्याय से मुक्ति दिलवाने का प्रयास किया परन्तु बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर ने इस गुलामी को जड़ से उखाड़ने का काम किया। बाबा साहेब ने मानवतावादी संविधान लिख कर न केवल बहुजन समाज को एक नया जीवन दिया अपितु छत्तीस बिरादरी के हित । उन्होंने समानता, स्वतंत्रता का दिलाकर न केवल समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया। 


सतीश नांदल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए की आज प्रदेश के अंदर इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो छत्तीस बिरादरी को साथ ले कर चलती है। जननायक ताऊ देवीलाल का सपना था कि समाज के अंदर प्रत्येक वर्ग को उनका अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने दलित, पिछड़े ओर पीड़ित वर्ग के लोगों के लिए मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अनेकों जनकल्याणकारी नीतियां बनाने का काम किया। ताऊ देवीलाल ने ही प्रदेश में दलित तबके को न केवल राजनीति में लाकर अपितु विधानसभा में भेजकर अपनापन दर्शाने का काम किया। जननायक ताऊ की नीतियों का अनुसरण करते हुए ही इनेलो सुप्रीमो चौधरी औमप्रकाश चौटाला ने भी दलित पिछड़े वर्ग के तबके को न केवल विधानसभा अपितु हिंदुस्तान की सबसे बड़ी पंचायत के सदस्य बनाने का काम किया। इनेलो ने पिछले वर्ष भी प्रदेश के सभी हल्कों में बाबा साहेब की जयंती पर सद्भावना सम्मेलन आयोजित कर बाबा साहेब को याद करने का काम किया। सतीश नांदल ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अनुरोध करते हुए कहा कि हमे आज बाबा साहेब के दिखाये हुए मार्ग पर चलने की जरूरत है।
दलित प्रकोष्ठ के जिला संयोजक सूरत सिंह खटक ने भी बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दलितों, दबे कुचले वर्ग की आवाज को उठा कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। वे प्रत्येक तबके की आवाज थे। बाबा साहेब की बदौलत ही हम खुलकर साँस लेते हैं।
इस अवसर पर सूरत सिंह खटक, राजन बोहत, दर्शन आसन, हवासिंह धानक, काला काहनौर, शिवा वैध, विष्णु बिड़लान, राजकुमार तंवर ईटीओ, हरिसिंह खटक, महेंद्र सुंडाना, मुकेश चहल, जगदीश किराड़, सूरज देहराज, श्यामफूल धानक, सुभाष भगवतीपुर इत्यादि के अलावा दलित व पिछड़े वर्ग के मौजीज व्यक्ति विशेष रूप से मौजूद थे।

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