Friday, March 24, 2017

इनेलो नेताओं ने एसवाईएल के अधूरे निर्माण को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री को सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली  : इनेलो नेताओं ने आज केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर एसवाईएल के अधूरे निर्माण कार्य को जल्द पूरा करवाने की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा और एसवाईएल को लेकर अब तक हरियाणा के पक्ष में आए सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों की प्रतियां भी ज्ञापन के साथ केंद्रीय गृह मंत्री को सौंपी। इनेलो के वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला और प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने इनेलो की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपा। इनेलो नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने के बाद दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हमने अपनी पार्टी की ओर से गृह मंत्री राजनाथ सिंह को अलग से एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें एसवाईएल पर पूरी वस्तुस्थिति और हरियाणा के पक्ष में आए 2002, 2004 व 10 नवम्बर 2016 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। 
इनेलो नेताओं ने कहा कि पिछले साल 24 मार्च को जब पंजाब सरकार ने एसवाईएल की जमीन वापिस किसानों को देने का निर्णय लिया तो उस समय इनेलो ने न सिर्फ इसका जोरदार विरोध किया बल्कि अपने सहयोगी दल से राजनीतिक संबंध भी विच्छेद करने का काम किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री जो इस समय यहां बैठे हैं उन्होंने न तो हरियाणा के लिए कोई पैरवी की और न ही उन्होंने ऐसे असंवैधानिक कार्य करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा के सीएम की कमजोरियों की वजह से ही आज पंजाब के लोग आए दिन धमकियां दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सीएम कोई पैरवी करते तो अब तक नहर की खुदाई निश्चित तौर पर शुरू हो जाती। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री से कोई जवाब नहीं बन पा रहा था और उन्होंने यही कहा कि इस बारे उन्होंने कई चि_ियां भी लिखी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सीएम का काम सिर्फ चि_ियां लिखना नहीं होता बल्कि प्रदेश के हितों की पैरवी करना होता है।
इनेलो नेताओं ने कहा कि एसवाईएल की लड़ाई असल में इनेलो ने ही लडऩे का काम किया है क्योंकि कांग्रेस तो पहले ही नहीं चाहती थी कि एसवाईएल का अधूरा निर्माण पूरा हो। इनेलो नेताओं ने ये भी कहा कि हरियाणा को एक बूंद पानी न देने की बात कहने वाले कैप्टन अमरेंदर सिंह जिस दिन मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे उस दिन हरियाणा के कांग्रेसी नेता उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर वहां रसगुल्ले खा रहे थे। उन्होंने कांग्रेस नेताओं की नीयत में खोट होने का भी आरोप लगाया। इनेलो नेताओं ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से इस मामले में जल्द कार्रवाई किए जाने और एसवाईएल के अधूरे निर्माण को पूरा करवाए जाने की मांग करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री से यह भी पूछा कि अब इस बारे में केंद्र सरकार क्या करने जा रही है? नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि राजनाथ सिंह उनकी बात को ध्यान से सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि अभी संसद का सत्र चल रहा है और संसद सत्र के बाद एक बार फिर आप लोगों के साथ एक बैठक और की जाएगी और कानूनी स्थिति देखकर इस पर आगे बढ़ा जाएगा। 
पत्रकारों के सवालों के जवाब में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एसवाईएल हरियाणा की जीवनरेखा है और इसका निर्माण पूरा करवाने के लिए जब भी उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री या प्रधानमंत्री की तरफ से कोई बुलावा आएगा तो वे न सिर्फ उनके साथ बैठक में शामिल होंगे बल्कि हरियाणा के हितों की जोरदार पैरवी भी करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि चार महीने पहले सर्वदलीय बैठक में सीएम ने भरोसा दिलाया था कि वे जल्द ही प्रधानमंत्री से मिलने का समय लेंगे और एसवाईएल पर सभी दलों को साथ लेकर प्रधानमंत्री से मिलेंगे लेकिन चार महीने से हरियाणा के मुख्यमंत्री को पीएम से मिलने का समय तक नहीं मिला है जबकि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री शपथ लेते ही एक हफ्ते के भीतर प्रधानमंत्री से मिलकर भी चले गए हैं। इनेलो नेताओं ने कहा कि जब इनेलो एसवाईएल को लेकर पंजाब कूच कर रही थी और संसद का घेराव करके इनेलो कार्यकर्ता लाठियां खा रहे थे उस समय सरकार में बैठे लोग कहते थे कि मामला अदालत में है। आज गृह मंत्री के पास मिलकर जब आए हैं तो यह साफ हो गया है कि मामला किसी अदालत में नहीं है बल्कि नहर के अधूरे निर्माण को केंद्र सरकार ने पूरा करवाना है और इस मामले में आज कहीं कोई कानूनी अड़चन नहीं है, इसलिए नहर का अधूरा निर्माण तुरंत पूरा करवाया जाए। केंद्रीय गृह मंत्री को इनेलो की ओर से दिए गए ज्ञापन में एसवाईएल को लेकर अब तक आए सभी फैसलों का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है।

Thursday, March 23, 2017

इनेलो नेता एसवाईएल पर सीधे केंद्रीय गृह मंत्री से मिलने जाएंगे - अभय चौटाला


चंडीगढ़ : इनेलो नेता एसवाईएल के मुद्दे पर शुक्रवार को अलग से केंद्रीय गृह मंत्री से मिलेंगे और शिष्टमण्डल का हिस्सा बनकर सीएम के साथ केंद्रीय गृह मंत्री के पास नहीं जाएंगे। यह बात इनेलो के वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने गुरुवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इनेलो नेता केंद्रीय गृह मंत्री से मिलकर एसवाईएल पर न सिर्फ हरियाणा का पक्ष रखेंगे बल्कि उनसे इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मिलने का समय तय करवाने और एसवाईएल की खुदाई का काम तुरंत किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपे जाने की मांग करेंगे। इनेलो नेता ने कहा कि सरकार एसवाईएल पर गम्भीर नहीं है और केवल मामले को लटकाने के लिए लीपापोती की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार गम्भीर होती तो एसवाईएल की खुदाई के लिए कोई केंद्रीय एजेंसी तय करवाकर अब तक खुदाई शुरू करवा दी जाती। उन्होंने कहा कि एसवाईएल पर फैसला सर्वोच्च न्यायालय की संविधानिक पीठ का है और इस फैसले को केंद्र व पंजाब सरकार को मानना ही होगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चौधरी देवीलाल की पुण्यतिथि 6 अप्रैल से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेगी और यह धरना तब तक जारी रहेगा जब तक नहर की खुदाई शुरू नहीं हो जाती।
इनेलो नेताओं ने कहा कि चार महीने पहले 19 नवम्बर को एसवाईएल पर मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और उस बैठक में यह तय हुआ था कि प्रदेश हित में सभी दल सीएम के नेतृत्व में एसवाईएल के मुद्दे पर प्रदेश का पक्ष रखने के लिए राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मिलेंगे। इस बारे में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था। बैठक के एक हफ्ते बाद ही राष्ट्रपति से मिलने का समय मिल गया और हरियाणा के सभी दल एसवाईएल पर राष्ट्रपति के समक्ष प्रदेश का पक्ष रखकर आए थे जबकि चार महीने से भी तीन दिन ज्यादा गुजर जाने के बाद भी अभी तक प्रधानमंत्री ने हरियाणा के सीएम को मिलने का समय नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जिस मुख्यमंत्री ने 19 मार्च को शपथ ली उसे 21 मार्च को पीएम से मिलने का समय मिल गया और 16 मार्च को जो मुख्यमंत्री बने उन्हें 22 मार्च को पीएम से मुलाकात का समय मिल गया। हरियाणा के मुख्यमंत्री को पीएम द्वारा मिलने का समय न देना प्रदेश की अनदेखी करना है। उन्होंने यह भी संदेह जताया कि हो सकता है सीएम मनोहर लाल ने पीएम से मिलने का समय ही न मांगा हो। अन्यथा जब अन्य मुख्यमंत्रियों को पीएम से मिलने का समय मिल जाता है तो हरियाणा के मुख्यमंत्री को समय क्यों नहीं मिल पाया?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एसवाईएल पर इनेलो बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने को तैयार है और इस बारे इनेलो द्वारा शुरू किए गए संघर्ष के तहत इनेलो कार्यकर्ताओं ने 23 फरवरी को शंभू बार्डर पर गिरफ्तारियां दी और केंद्र पर दबाव बनाने के लिए न सिर्फ 15 मार्च को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया बल्कि संसद का घेराव करके एक नया इतिहास रचने का भी काम किया। उन्होंने कहा कि हमने प्रदेश के सभी राजनेताओं व दलों को 23 फरवरी व 15 मार्च के संघर्ष का न्यौता दिया था ताकि केंद्र पर दबाव बनाया जा सके। इनेलो कार्यकर्ताओं ने तमाम बैरिकेट्स तोडक़र संसद के समक्ष पहुंचकर पूरे देश को यह अहसास करवाया कि हरियाणा के साथ एसवाईएल के मुद्दे पर अन्याय हो रहा है और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला भी लागू नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि संसद घेराव में महिलाओं सहित इनेलो के अनेक कार्यकर्ता घायल हुए जो आज भी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। 
इनेलो नेता ने कहा कि एक तरफ सीएम कहते हैं कि एसवाईएल का मामला अदालत में लंबित है तो फिर वे गृह मंत्री से मिलने क्यों जा रहे हैं और राष्ट्रपति से क्यों मिले व प्रधानमंत्री को मिलने के लिए क्यों चि_ी लिखी? इनेलो नेता ने कहा कि जो लोग एसवाईएल पर हमारा मजाक उड़ाते थे कि कस्सी फावड़े से नहर नहीं खुदा करती और मामला अदालत में लंबित होने की दुहाई देते थे वे प्रधानमंत्री या केंद्रीय जलसंसाधन मंत्री से मिलने की बजाय गृह मंत्री से मिलने क्यूं जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि गृह मंत्री से तो कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर चर्चा के लिए मिला जाता है। इनेलो नेता ने कहा कि पंजाब के मौजूदा मुख्यमंंत्री शपथ ग्रहण से पहले कहा था कि पंजाब का एक बूंद पानी भी किसी को नहीं देंगे लेकिन मुख्यमंत्री ने इस बारे उनका विरोध करते हुए केंद्र को कोई चि_ी तक नहीं लिखी। इनेलो नेता ने कहा कि उनकी पार्टी पहले ही यह तय कर चुकी है कि हम सीएम हरियाणा के साथ नहीं जाएंगे क्योंकि सरकार इस मामले में गम्भीर नहीं है। ऐसे में इनेलो नेता नेता प्रतिपक्ष अभय सिंह चौटाला व प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा सीएम के शिष्टमण्डल का हिस्सा बनने की बजाय सीधे केंद्रीय गृह मंत्री के पास जाएंगे और  नहर की खुदाई शुरू करवाने बारे प्रदेश का पक्ष रखेंगे और पीएम से मिलने का समय तय करवाने का भी आग्रह करेंगे। उन्होंने कांग्रेस नेता व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की भी आलोचना करते हुए कहा कि वे एक तरफ तो कैप्टन अमरेंदर सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर उन्हें बधाई देते हैं जो बार-बार कह रहे हैं कि एक बूंद पानी भी हरियाणा को नहीं दूंगा और वहीं दूसरी ओर आए दिन अखबारी बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनेलो नहर की खुदाई का श्रेय नहीं लेना चाहती और अगर मौजूदा सरकार नहर खुदाई करवाकर प्रदेश का पानी लाने का काम करेगी तो सारा श्रेय उन्हें देने के साथ-साथ उनका माला डालकर स्वागत करने में भी हम पीछे नहीं  हटेंगे। पत्रकार सम्मेलन में इनेलो नेता आरएस चौधरी, बीडी ढालिया, बलदेव बाल्मीकि, राम सिंह बराड़, एनएस मल्हान, प्रवीन आत्रेय व एडवोकेट रविंद्र ढुल भी मौजूद थे।
जाट आरक्षण आंदोलन पर मुख्यमंत्री की बयानबाजी शर्मनाक: नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर धरने पर बैठे जाट आरक्षण आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के नेतृत्व वाली कमेटी गठित करके उन्हें बातचीत के लिए भेजते हैं जिनमें तीन मंत्री व मुख्य सचिव के अलावा गृह सचिव भी शामिल थे और दूसरी तरफ सीएम यह कह देते हंै कि मुझे कोई जानकारी नहीं है कि आंदोलनकारियों के साथ उन्हें कोई संयुक्त पत्रकार सम्मेलन करना है। उन्होंने कहा कि इससे पहले रामबिलास शर्मा कमेटी आंदोलनकारियों के साथ मामला सुलझाकर यह ऐलान करती है कि कल इस बारे एक संयुक्त पत्रकार सम्मेलन में विधिवत घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब जब मांगें स्वीकार की गई हैं, ये वही सब मांगें हैं जो पिछले साल 19 फरवरी को मान ली गई थी लेकिन उन्हें एक साल तक लागू न करके लोगों को जानबूझकर धरने पर बैठने को मजबूर किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को आपस में लड़वाने और उनका भाईचारा तोडऩा चाहती थी लेकिन धरने पर बैठने वाले किसान इस बात को लेकर बधाई के पात्र हंै कि उन्होंने संयम व सहनशीलता बनाए रखी और फिर से आपसी भाईचारा खराब करने के प्रयासों को सफल नहीं होने दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आंदोलनकारियों के साथ जो समझौता किया है उसको लागू करने में सरकार की नीयत पर अभी भी संदेह है और उन्हें अंदेशा है कि कहीं सरकार फिर से लोगों को धरने पर बैठने के लिए मजबूर न कर दे।
सोलह हज़ार गैस उपभोक्ताओं को महीने में 4 हज़ार सिलेंडर की भी डिलीवरी नही, सरकार की विफलता - प्रदीप चौधरी


इनेलो पूर्व विधायक एवं जिलाध्यक्ष प्रदीप चौधरी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वैसे तो सरकार हर मोर्चे पर फेल है, लेकिन लोगों को मूलभूत सुविधाएं देने में भी नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि रायपुररानी में लोग रसोई गैस को लेकर परेशान हो रहे है हो सरकार सोई हुई है। चौधरी ने कहा कि रायपुररानी में एक मात्र गैस एजेंसी है और जिसके करीब साढ़े 15 हज़ार उपभोक्ता है, लेकिन उपभोक्ताओं की जरूरत के अनुसार गैस नही मिल पा रही है और रोजाना लोग पट्रोल फूंक कर बिना गैस ले लौट जाते है। सरकार बताए की जब 15 हज़ार से ज्यादा गैस उपभोक्ताओं के लिए एक सप्ताह में 2500 सिलेंडर भी नही आ पा रहे है, ऐसे में साढ़े 15 हज़ार गैस उपभोक्ताओं को हर महीने परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्रदीप चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार बने अढाई साल से ज़्यादा वक्त हो गया , लेकिन अभी तक अपना एक भी वादा पूरा नही कर पाई, गावों में वाईफाई की सुविधा देने की घोषणा की थी, अभी तक  एक भी गांव की वाईफाई से कनेक्टविटी नही हो पाई, सरकार के जिले 119 से ज्यादा गावों में 24 घंटे बिजली देना कागजों तक ही सिमट गया। गावों में रोजाना कट लग रहे है और फॉल्ट के बहाने कट लगाए जा रहे है।
शहीदों से प्रेरणा लेकर युवाओं को देशहित के लिए करने चाहिए सामाजिक कार्य - कुणाल गहलावत


सोनीपत : आजादी के लिए भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु ने अग्रेजों से लोहा लिया था, उन शहीदों का साहसिक कार्य आज युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत का कार्य कर रहा है। यह बात इनेलो के युवा जिलाध्यक्ष कुणाल गहलावत ने जिला इनेलो कार्यालय में शहीदों को श्रदांजली देते हुए कही। गहलावत ने कहा हमें अपने दिल के अंदर इस बात को रखना चाहिए कि हम आज जिस खुली हवा में सांस ले रहे है इसके पिछे कितने शहीदों ने यातनाएं सहन करके अपनी जान की कुर्बानी दी थी। हमें ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे समाज का भाईचारा बिगड़े। जो लोग आज जाति-पाती का नारा देकर समाज को बांटना चाहते हैं, युवाओं को उनके प्रति सचेत रहकर संगठित होकर ऐसी ताकतों से लडऩे के लिए तैयार रहना चाहिए।
इस मौके पर गोहाना हल्काध्यक्ष प्रदीप बड़वासनी, जिला प्रैस प्रवक्ता फुलकुवार चौहान, प्रो. बंसीलाल कुण्डू, विकास मलिक, संजय मलिक, हरेन्द्र राठी, अमित चोपड़ा, प्रदीप सैनी, अशोक पंडित, यतिन हसीजा, नितीन वर्मा, सागर, नवदीप राठी शाबर अली आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।  

Wednesday, March 22, 2017

पूंजीपतियों को 95 हजार करोड़ का पैकेज, तो किसानों का कर्ज माफ क्यों नहीं - दुष्यंत



नई दिल्ली : कारपोरेट जगत के लिए सरकार 95 हजार करोड़ रूपये की राहत दे सकती है तो फिर केंद्र सरकार को देश के किसानों की कर्ज माफी में क्या परेशानी है। इनेलो संसदीय दल के नेता व हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला ने बुधवार को  लोकसभा में केंद्र सरकार के समक्ष यह सवाल खड़ा किया। इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला ने लोकसभा में वित्त बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए पांच से दस लाख तक आय वाले लोगों पर 20 प्रतिशत आयकर को कम करने, एसवाईएल निर्माण के लिए बजट में धन का प्रावधान करने, जीएसटी बिल के लागू होने से इंस्पेक्टरी राज संबंधी स्थिति स्पष्ट करने और नोटबंदी के बाद आयकार विभाग की स्टेटस रिपोर्ट की मांग की। 
दुष्यंत चौटाला ने आज लोकसभा में किसानों को बिना ब्याज के तीन लाख रूपये की राशि केसीसी के तहत और चार प्रतिशत ब्याज पर केसीसी से 8 लाख रूपये की राशि किसानों को देने की मांग दोहराई। इनेलो सांसद ने आज सदन में कहा कि पांच से दस लाख आमदनी वाले लोगों पर 20 प्रतिशत आयकर लगाया गया है। सरकार के इस कदम से देश के वरिष्ठ नागरिक और सेवानिवृत्ति के नजदीक वाले कर्मचारी सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं जिनकी आमदनी पूरे जीवन के सेवाकाल के बाद इतनी हुई है। उन्होंने मांग की कि पांच से दस लाख की आमदनी वाले लोगों के लिए 20 प्रतिशत आयकर की दर को कम किया जाए। 
दुष्यंत चौटाला ने केंद्र सरकार की किसानों की कर्ज माफी की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार से जब किसानों के कर्ज माफी की मांग की जाती है तो वह आरबीआई का हवाला देते हुए इसे असंभव करार देती है जबकि केंद्र सरकार स्वयं कारपोरेट जगत को करों के रूप में 95 हजार करोड़ की राहत देने जा रही है। उन्होंने पूछा कि सरकार की यह दोगली नीति क्यों है। पूंजीपतियों को राहत के तौर पर इतने बड़े पेकैज देने का मकसद क्या है तथा सरकार खजाने में होने वाले इस नुकसान की भरपाई सरकार कैसे करेगी। सांसद दुष्यंत चौटाला ने नोटबंदी के दौरान बैंक में भ्रष्टाचार के मामले सामने आने का भी जिक्र किया। 
युवा सांसद ने कहा कि जीएसटी के तहत उन नए प्रावधानों पर पुन: विचार करे जिसके तहत अधिकारियों को और अधिकार दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे अधिकारियों को बड़े अधिकारियों के बराबर अधिकार देने से देश में इंस्पेक्टरी राज कायम हो जाएगा। उन्होंने सरकार से पूछा कि सरकार कब जीएसटी लागू करने जा रही है और इसमें आम आदमी के लिए जीएसटी के तहत करों सेस के रूप में लगने वाले उपकरों को समाप्त करने जा रही है या नहीं। उन्होंने सरकार ये यह भी पूछा कि नोटबंदी के बाद आयकर विभाग ने कितने लोगों को नोटिस दिए और इनमें कितने नोटिस का निदान हो गया और कितने नोटिस का निपटारा होना बाकी है।

Monday, March 20, 2017

खेलों से बढ़ता है आपसी भाईचारा - पदम


सोनीपत : खेलों से आपसी भाईचारा बढ़ता है व शारीरिक विकास होता है यह बात इनेलो जिलाध्यक्ष एवं रोहट हल्का क पूर्व विधायक पदम सिंह दहिया ने गांव बिधलान में कुश्ति दंगल में बतौर मुख्यातिथि में शिरकत करते हुए कही। पहले नंबर की कुश्ति में हरियाणा पूलिस का जवान रामकरण व गांव बिधलान का भीम पहलवान बराबरी पर रहे। 
दहिया ने कहा इनेलो की सरकार बनने के बाद नई खेल निती बनाई जाएगी। खिलाडिय़ों की सारी समस्याओं को दूर करके उनके रस्ते के सारे कांटो को दुर किया जाएगा। दहिया ने कहा इनेलो की सरकार ने खेलों को हमेशा बढ़ावा देने का काम किया। आज खिलाड़ी युवाओं के आदर्श बन चुके है। दहिया ने कहा सरकार को खिलाडिय़ों की मुलबुत सुविधाओं का ख्याल रखना चाहिए। आज गांव के अंदर किसी भी स्टेडियम में न तो कोच का प्रबंध है और न ही कोई सुविधा। खिलाड़ी अपनी मेहनत से प्रदेश व देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
इस मौके पर युवा जिलाध्यक्ष कुणाल गहलावत, प्रोफेसर बंसीलाल कुण्डू, ककरोई के पूर्व सरपंच नरेन्द्र उर्फ लिलू, रमेेेश, सेठ रामदेव, नरेन्द्र उर्फ नान्हा, सरपचं शमशेर, राजेन्द्र उर्फ काला, सोनी आदि गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। 
सरकार की नाकामियों की वजह से झेलनी पड़ी लोगों को परेशानी - लितानी

हिसार : इनेलो जिलाध्यक्ष राजेंद्र लितानी ने सरकार की नाकामियों की वजह से ही प्रदेश की जनता पिछले 50 दिनों से भी अधिक समय से परेशानी झेल रही है। अगर सरकार आंदोलनरत जाट समाज के लोगों की शुरू में ही मांगें मान लेती तो लोगों की जान सांसत में नहीं पड़ती। लेकिन अपनी हठधर्मिता के चलते सरकार ने जाट समाज के लोगों के आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर किया। इनेलो नेता लितानी ने कहा कि जाट समाज अपने हकों व जायज मांगों को लेकर आंदोलनरत है और लोकतंत्र में अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन करना सभी का अधिकार है। लेकिन पिछले 50 दिनों से पूरी सरकारी मशीनरी जाट समाज की मांगों को मानने की बजाए इस आंदेालन को दबाने में लगी हुई है। इसमें करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं, जो प्रदेश की जनता की खून पसीने की कमाई है। उन्होंने कहा कि पिछले 50 दिनों से पूरे प्रदेश में एक संशय का माहौल और किसी भी अनहोनी की आशंका को लेकर लोगों में भय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जाट समाज को आंदोलन करने का कोई शौक नहीं है। वे केवल अपना अधिकार मांग रहे हैं। इसलिए सरकार को भी चाहिए था कि वे समय पर उनकी मांगों को पूरा कर देती। लितानी ने कहा कि गत दिवस सरकार व जाट नेताओं में जो सहमति बनी है, वे आंदोलन के पहले दिन भी बन सकती थी। लेकिन भाजपा सरकार जानबूझ कर ऐसा नहीं चाहती थी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया किया कि अब भी वह अपनी हठधर्मिता छोड़ते हुए समझौते के अनुसार जाट समाज की मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरी करे ताकि प्रदेश में अमन चैन कायम रह सके।